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।। गया जी तीर्थ पुरोहित पंडित मंगल शास्त्री ||
चांद चौरा विष्णुपद गया बिहार

गया जी के प्रमुख्य तीर्थ पुरोहित पं० मंगल शास्त्री जी के द्वारा 1990 से आज तक उन सभी पिंडदानियों व यात्रियों के द्वारा अपने पूर्वजों के प्रति पिंडदान करने आने वाले उन सभी लोगों की सेवा में तत्पर रहे है। गया जी में पिंडदान व तर्पण पूजा और पवित्र स्थानों के दर्शन करने के लिए दुनिया भर से लोग गया जी आते हैं।

गया जी के प्रमुख्य तीर्थ पुरोहित पं० मंगल शास्त्री जी गया के एक ऐसा तीर्थ पुरोहित है जो लोगों को गया जी के पवित्र स्थानों पर पिंड दान और तर्पण कराते हैं, यात्रियों के उनकी अपनी मातृ भाषा में अनुष्ठान कराते हैं, यात्रियों के आवास प्राप्त करने और भोजन कराने के लिए सर्वोत्तम सेवा दिलाते है।

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ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च। नमः स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नमः।। पूर्वजन्म के विविध पुण्य अथवा पाप कर्म के फलस्वरूप इस जन्म में मानव को सुख तथा दु:खों की प्राप्ति होती है। पूर्व जन्म के पाप अथवा पुण्य कर्मों का ज्ञान जन्म कुण्डली के माध्यम से ही होता है। जन्मकुण्डली में जन्म के समय के आकाश में विराजमान ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति का रेखाचित्र वर्णित रहता है। उस जन्म-समय के अनुसार प्राप्त ग्रहयोगों के माध्यम से गुण और दोषों की समीक्षा की जाती है।

पितृ दोष मुख्य रूप से एक पितृ-श्राप है। योग्य व विद्वान् ज्योतिषी जन्मकुण्डली को देखकर इस पितृदोष के बारे में बता सकते हैं। इस दोष के कारण जीवन में बहुत समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जैसे- बाल्यकाल में रोग, शिक्षा में रूकावट, शिक्षा में मन ना लगना, युवावस्था में विभिन्न विषयों के प्रति आसक्ति तथा व्यसन में संलग्नता, योग्यता के अनुरूप नौकरी ना मिलना,अथक प्रयास और संघर्ष करने के बाद भी जीवन का निर्वाह साधारण रूप से होना तथा विवाह में विलम्ब, विवाह के उपरान्त सन्तान प्राप्ति में बाधा, घर-परिवार में कलह, बिना अपराध के न्यायालय के द्वारा कारावास आदि का दण्ड तथा पारिवारिक सदस्यों की असमय रोग, विष, आत्महत्या अथवा दुर्घटना आदि विभिन्न कारणों से मृत्यु होना अथवा असाध्य रोगों से ग्रसित होकर लम्बे समय तक बिस्तर पर पड़े रहना आदि अनेक प्रकार के विषय हैं। इस पूजा के दौरान पितृ गायत्री मंत्र का जाप किया जाता है और आपके पितरों की शान्ति के लिए प्रार्थना की जाती है। विधि पूर्वक इस पूजा को संपन्न करने से वंशवृद्धि होती है और आपकी आने वाली 7 पीढ़ियों का उद्धार होता है।

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